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दो बार टूटा सपना; लेकिन Ankita Agarwal ने नहीं मानी हार, फिर ऐसे हासिल की Success

आपको ऐसी बेटी की सक्सेस स्टोरी बता रहे हैं, जो तीसरी बार में अपने सपने को पूरा करने में कामयाब रहीं।

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Newz Funda, New Delhi IAS Ankita Agarwal को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। उनकी Story बेहद ही रोमांचक है। उन्होंने चाचा-चाची, दादा-दादी के साथ पढ़ाई कर आखिर में सपना पूरा कर लिया।

बचपन से ही दिशा तय कर ली थी कुछ बनने की। फिर IAS बनकर दिखा दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं। बता दें कि उनके आईएएस अधिकारी बनने के सफर को पूरा करने में किसी ने सबसे अधिक योगदान दिया तो वो है परिवार।

जिनकी प्रेरणा ने बेटी को सफलता की ऊंचाइंयों पर पहुंचा दिया। आइए पढ़ते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी।

अपने तीसरे अटेंप्ट में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल करने वाली अंकिता अग्रवाल कोलकाता की रहने वाली हैं।

अंकिता ने अपनी स्कूली शिक्षा कोलकाता में पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपने ऑप्शन  सब्जेक्ट के रूप में पॉलिटिकल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशन को चुना।

तीसरी बार मार लिया मैदान
अंकिता ने तीन बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी है। 2019, 2020 और 2021 में। उन्होंने 2019 में एआईआर 236 रैंक प्राप्त की और भारतीय राजस्व सेवा सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर के साथ ट्रेनिंग की।

आईआरएस के लिए चुने जाने के बावजूद, उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल होने के लिए और मेहनत करने का फैसला किया।

दूसरी रैंक हासिल करने पर उनकी प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा के लिए क्वालिफाई करने की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी रैंक लाना मेरे लिए बहुत ही आश्चर्यजनक रहा।

अंकिता का पालन-पोषण उनके दादा-दादी और चाचा-चाची की देखरेख में एक जॉइंट फैमिली में हुआ था। अंकिता का परिवार कई साल पहले बिहार से ताल्लुक रखता था।

उसके पिता एक बिजनेसमैन हैं, जिनकी बड़ाबाजार इलाके में हार्डवेयर की दुकान है। मां हाउसवाइफ हैं। 

परिवार ने हमेशा दिया मेरा साथ
अंकिता का कहना है कि उनके आईएएस अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने में उनके परिवार ने उनका बहुत साथ दिया। उन्होंने कभी भी उन पर अपने सपनों का बोझ नहीं डाला और न ही उन्हें पढ़ाई करने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने कहा कि यूपीएससी परीक्षा पास करने की लंबी यात्रा के दौरान उनके परिवार के सपोर्ट के लिए वह आभारी हैं।

"मैं अपने लक्ष्य के बारे में स्पष्ट थी और इसलिए पोस्टग्रेजुएशन डिग्री के लिए अप्लाई नहीं करने का फैसला किया। मैंने एक साल तक काम किया और फिर यूपीएससी की तैयारी में जुट गई।

मैंने 2019 में परीक्षा के लिए क्वालिफाई किया और आईआरएस में शामिल हो गई लेकिन मेरा लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होना था। इसलिए मैंने 2021 में फिर से परीक्षा दी। यह मेरा अटेंप्ट था।"